प्रभु का प्रार्थना क्या है ?
एक दिन प्रभु अपने चेलों के साथ बैठ के बातें कर रहे थे । उसी समय चेलों के बीच में से एक ने प्रभु से पूछा । प्रभु प्रार्थना कैसे करते है हमें सिखाए । उसी समय प्रभु ने जो प्रार्थना अपने चेलों को सिखाया था उसी प्रार्थना को प्रभु की प्रार्थना कहा जाता है ।
प्रभु की प्रार्थना इस प्रकार है –
- हे हमारे पिता , तू जो स्वर्ग में है ।
- तेरा नाम पवित्र किया जाए ।
- तेरा राज्य आये ।
- तेरी इच्छा जैसे , वैसे ही पृथ्वी पर भी हो।
- हमारे प्रतिदिन की रोटी आज हमको दे
- और हमारे अपराधों को छमा कर जैसे हम अपने अपराधियों को छमा करते है ।
- और हमको परीक्षा में मत डाल
- परंतु बुराई से छोड़ा ।
- क्योंकि राज और पराक्रम और महिमा तेरा ही है । आमीन ।
प्रभु ने खुद अपने चेलों को यह प्रार्थना सिखाया था इसीलिए यह प्रार्थना को प्रभु की प्रार्थना कहा जाता है।
प्रभु की प्रार्थना कब किया जाता है ?
आपको अच्छे से प्रार्थना करना नही आता है तो आप प्रभु की प्रार्थना भी कर प्रार्थना के रूप से कर सकते है । क्योंकि प्रभु की प्रार्थना में हर प्रकार की प्रार्थनाएं एक साथ जोड़ी हुई है । हर एक विषय जोड़ी है । प्रभु की प्रार्थना को हम प्रार्थना के पहले भी कर सकते है या फिर प्रार्थना के अंत मे भी उस प्रार्थना को जोड़ सकते है ।
प्रभु का प्रार्थना का अर्थ क्या है ?
हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है– इसका अर्थ या है कि हमारे सृष्टिकर्ता परमेस्वर पिता स्वर्ग में है । वह हमारा पिता है और हम उसके बच्चे है ।
तेरा नाम पवित्र किया जाए – इसका अर्थ या है की हमें हर समय में हमारे सृष्टिकर्ता पिता के नाम को धन्य कहना चाहिए ।
तेरा राज्य आये – इसका अर्थ या है कि जैसे परमेश्वर पिता के राज्य स्वर्ग है और वहाँ न दुःख, न कष्ट, न बिमारी, न अकाल, न कोई भी प्रकार का परिसान है । पर रोज आनन्द और खुसी हैं वैसे ही हमारे इस पृत्वी पर हो ।
तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में, वैसे ही पृथ्वी पर भी हो – इसका अर्थ या है कि परमेश्वर पिता ही है जो सारे सृष्टि के बनाया है और सारे सृष्टि उसी का है । इसलिए पृत्वी पर मनुष्यों के इच्छा के जैसा नही पर परमेश्वर पिता के इच्छा के अनुसार हुए । प्रेम , धार्मिकता, सच्चाई हुए ।
हमारे प्रतिदिन की रोटी आज हमको दे – इसका अर्थ है कि हम मनुष्य को जीवित रहने के लिए हर प्रकार की चीजों की जरूरत होती है । खाना-पीना, ओढ़ना-पहना, धन-संपत्ति, चीज-वस्तु , दोस्त-मित्र, परिवार इत्यादि। प्रार्थना करना चाहिए कि यह सब परमेश्वर पिता हमें रोज दिया करें ।
और हमारे अपराधों को छमा कर जैसे हम अपने अपराधियों को छमा करते है – इसका अर्थ या है कि हम अपने अपने गुन्हेगार या अपराधी को माफ कर देना चाहिए, और उनके साथ मेल मिलाप के साथ रहना चाहिए । क्योंकि प्रभु यीशु ने हमारे सारे पापों को छमा किया है और क्रूस में अपने को वलिदान देकर हमें उद्धार किया है ।
और हमको परीक्षा में मत डाल – इसका अर्थ या है कि हम मनुष्य के बीच में न जाने कितने परिस्थितियों कितने परीक्षा आते है पर परमेश्वर पिता उसकी विस्वासी लोगों को सारे परीक्षा से रक्षा करते है । इसलिए हम परमेश्वर पिता को धन्यवाद देना चाहिए। आज जो हम सुरक्षित है सिर्फ उसी के कारण ।
परंतु बुराई से छुड़ा – इसका अर्थ या है कि हम मनुष्य को या नहीं पता होता है कि कब हमारे बच में क्या होना है, किन किन दुखों में हम पड़ सकते है, किन किन पापों में पड़ सकते है हमें कुछ भी नही पता होता है । पर परमेश्वर पिता सब कुछ देखता और जनता है और हमें उन सारे पाप बुराई से बचाता है ।
क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा तेरा ही है , आमीन । – इसका अर्थ यह है कि जब तक हम जीवित है परमेश्वर पिता की राज्य हमारे पृत्वी पर हो, वह हमारे इस लोक की राजा होंगे और उसकी महिमा हम सदा करते रहेंगे । अंत में आमीन का अर्थ भी या है कि जो जो हम प्रार्थना मांगते है नि: संदेह वैसा ही हो, पर हमारे इच्छा नही परमेश्वर पिता के इच्छा के जैसा हुई ।
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