प्रार्थना क्या है ?
हर किसी के मन में यह सवाल जरूर आया होगा की प्रार्थना क्या है ? लोग प्रार्थना क्यों करते है ?
आज हम इसे विषय के ऊपर चर्चा करेंगे । सबसे पहले हम जान लेंगे की प्रार्थना क्या है – प्रार्थना एक प्रकार की अनुरोध को दर्शाती है । जब भी हम किसी से कुछ मांगते है तो हम उसे अनुरोध करते है और उसी प्रकार जब हम किसी से अपने गलतियों के लिए माफी मांगते है तो हम उसे अनुरोध करते है की हम माफ़ करो । इससे हमको यह जानने को मिलते है की हर प्रकार की अनुरोध को हम एक साथ में प्रार्थना भी कह सकते है ।
ईश्वर से प्रार्थना कैसे करे और क्यों करे ? अपने मन की बात को ईश्वर तक पहुंचाने का मूल आधार को हम प्रार्थना कहते है । अपने मन की इच्छा को हम प्रार्थना के मदत से हम ईश्वर तक पंहुचाते है । अब हमारे मन में यह सवाल आता है की हमे प्रार्थना क्यों करना चाहिए । प्रार्थना करने का दो मकसत होता है पहला है अपने इच्छा को पूरा करने का आशीर्वाद
पाने के लिए और दूसरा है ईश्वर के दृष्टि में किया हुआ पाप अपराधों को ईश्वर आगे मन लेना ।
प्रार्थना हमे कब करना चाहिए ? प्रार्थना करने का कोई निर्धारित समय नहीं है । पर जब भी आप फ्री समय हो तो अब प्रार्थना कर सकते है ।
क्या आप भी प्रार्थना सीखना चाहते हो ? प्रार्थना की तैयारी कैसे करते है ?

बाइबिल हमे कहते है की जब हम प्रार्थना करे तो कापटियों के जैसे नही करे। हम दूसरों को देखाने के लिए जोर जोर से ऊँचे आवाज में प्रार्थना न करे । जब भी हम प्रार्थना करे तो मन और हृदय से, संत होकर प्रार्थना करे । प्रार्थना मन से किया जाता है, इसलिए प्रार्थना करने समय में एक बात ध्यान देना जरूरी है कि हमारे प्रार्थना से किसी को भी कोई भी प्रकार की परीशान न हो ।
प्रार्थनाएं आप इस प्रकार से भी शुरू कर सकते है –
1. प्रार्थना करने पहले थोड़ी देर हम अपने आप को संत करे और सारे चिंता को भुलाकर आराम करें ।
2. दूसरे बात यह है कि – प्रार्थना में हम किन किन विषय के ऊपर प्रार्थना करे उसके लिए एक छोड़ी पर्ची भी बनाए, यह इसलिए की जब भी हम प्रार्थना करते है तो कुछ कुछ विषय को हम भूल जाते है ।
3. प्रार्थना से पहले हो साके तो एक गीत गाए, इससे अपने मन को कुमालता मिलता है, और प्रभु की प्रति हमारे मन ध्यान ज्यादा होता हैं।
4. यह करने के बाद आप प्रार्थना की लिए तैयार हो चुके हो । प्रार्थना आप बैठ के भी कर सकते है, खड़े होकर भी प्रार्थना कर सकते हो या फिर घुटने टेककर भी आप प्रार्थना कर सकते हो, जो भी आप के लिए सहज होगा ।
प्रार्थना कैसे करे
प्रार्थना करने का तरीका हर किसी के पास अलग अलग होता है । पर कुछ चीज जो प्रार्थना में हमे स्मरण करना चाहिए वह इस प्रकार है –
1.प्रार्थना का पहला भाग है सम्भोधन करना । जैसे – “हे सर्वशक्तिमान ईस्वर दयालु पिता” हम प्रार्थना करते है ।
2. दूसरे भाग है अपने पापों को मान लेना । हर दिन हम अपने कामों से , बातें से , सोच से जाने अनजाने में बहुत पाप अपराध करते है इसीलिए प्रार्थना में हमे पहले अपने पापों को मान लेना चाहिए ।
3. प्रार्थना के तीसरे भाग है धन्यवाद देना । हर दिन हमारे साथ कुछ न कुछ विपत्ति आते है पर ईस्वर हमे उन विपत्ति से बचते है इसलिए धन्यवाद देना उचित है । हमे रोज नये नये आशीष देता है इसलिए भी धन्यवाद देना चाहिए ।
4. प्रार्थना का चौथा भाग है – मूल विषय पर प्रार्थना । आप प्रार्थना में कुछ मांगना चाहते हो तो प्रार्थना करे । प्रार्थना के हर एक विषय को आप एक साथ प्रार्थना करे ।
5.अंत में फिर से धन्यवाद देते हुए अपने प्रार्थना को अंत करे ।
प्रार्थना से क्या मिलता है ।
जो भी मन से प्रार्थना करते है और जो भी मांगते है वह उसे जरूर मिलता है । प्रार्थना करने से मन को शांति मिलता है । प्रार्थना से हम हर प्रकार के आशीष को पा सकते है । केवल प्रार्थना के द्वारा ही आत्मिक वरदान को हम पा सकते है । प्रार्थना के द्वारा ही हर प्रकार समस्याओं से उद्धार पा सकते है ।
कभी कभी हमें प्रार्थना की प्रतिफल नही मिलता है यह किसलिए ? प्रार्थना करने वालों के लिए यह सबसे बड़ा सवाल होता है कि प्रार्थना करने के बाद भी प्रतिफल क्यों नही मिला है । ईस्वर हमारे प्रार्थना के प्रतिफल अपने समय के अनुसार दिया करते है क्योंकि उनको पता है कि कब हमको क्या चाहिए। जो हमारे लिए अच्छा है और हमें चाहिए तो वह देना चाहेगा । पर हमें विस्वास और धीरज के साथ रोज प्रार्थना करना चाहिए तोभी हमें वह अपने प्रार्थना के प्रतिफल समय में दिया करेगा । सिर्फ एक दिन प्रार्थना से वह संतोष नही भी हो सकता है इसीलिए हमें रोज प्रार्थना करना चाहिए । कुछ लोग ऐसा भी होता है कि अपने विपत्ति के समय मे सिर्फ ईस्वर को याद करते है और प्रार्थना करते है अछे समय में ईस्वर को भूल जाते है । ऐसे में ईस्वर हमसे नाराज हो जाते है । इसलिए हमें हर दिन दुःखों में भी सुखों में भी प्रार्थना करना चाहिए और धन्यवाद देते हुए प्रशंसा करते रहना चाहिए ।
और एक बाद प्रार्थना हमेसा दुसरों के लिए भी करना चाहिए ।
Maja hai
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